CHAURASIA HANDICRAFT

Saturday, 22 December 2018


क्रिसमस ईसाइयों का सबसे बड़ा त्योहार है। ईसाई समुदाय के लोग इस त्योहार को बहुत धूमधाम और उल्लास के साथ मनाते हैं। यह त्योहार हर वर्ष 25 दिसंबर को मनाया जाता है। इसी दिन प्रभु ईसा मसीह या जीसस क्राइस्ट का जन्म हुआ था। जीसस क्राइस्ट एक महान व्यक्ति थे और उन्होंने समाज को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने दुनिया के लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया था। इन्हें ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। उस समय के शासकों को जीसस का संदेश पसंद नहीं था। उन्होंने जीसस को सूली पर लटका कर मार डाला था। ऐसी मान्यता है कि जीसस फिर से जी उठे थे।क्रिसमस के दिन ईसाई लोग अपने घर को भलीभांति सजाते हैं। क्रिसमस की तैयारियां पहले से ही होने लगती हैं। लगभग एक सप्ताह तक छुट्टी रहती है। बाजारों की रौनक बढ़ जाती है। घर और बाजार रंगीन रोशनियों से जगमगा उठते हैं। चर्च में विशेष प्रार्थनाएं होती हैं। लोग अपने रिश्तेदारों एवं मित्रों से मिलने उनके घर जाते हैं। सभी एक-दूसरे को उपहार देते हैं। इस दिन आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। इसकी विशेष सज्जा की जाती है। इस त्योहार में केक का विशेष महत्व है। मीठे, मनमोहन केक काटकर खिलाने का रिवाज बहुत पुराना है। लोग एक-दूसरे को केक खिलाकर पर्व की बधाई देते हैं। सांताक्लाज का रूप धरकर व्यक्ति बच्चों को टॉफियां-उपहार आदि बांटता है।ऐसा कहा जाता है कि सांताक्लाज स्वर्ग से आता है और लोगों को मनचाही चीजें उपहार के तौर पर देकर जाता है।

  
आज क्रिसमस जितना धार्मिक है, उतना ही सामाजिक पर्व बन गया है। इस अवसर पर सभी व्यावसायिक गतिविधियां अपनी चरम सीमा पर रहती हैं। इस दौरान प्रार्थनाएं, क्रिसमस गीतों कैरोल्स का गायन, शुभकामना कार्ड् का आदान-प्रदान और आमोद-प्रमोद त्योहार के अभिन्न भाग हैं। क्रिसमस से कई दिन पहले ही सभी ईसाई समुदायों द्वारा कैरोल्स गाए जाते हैं और प्रार्थनाएं की जाती हैं।* सारी दुनिया के गिरजाघरों में यीशु की जन्मगाथा झांकियों के रूप में प्रदर्शित की जाती है। 24-25 दिसंबर के बीच की रात को पूरे समय आराधना-पूजा की जाती है। भक्तिभावपूर्ण गीत गाए जाते हैं। दूसरे दिन सवेरे से ही जन्मदिन का समारोह होता है। लोग एक-दूसरे को गले लगाते हैं, बधाइयां देते हैं तथा रोटी पवित्र मदिरा का प्रसाद ग्रहण करते हैं। गिरजाघरों में मंगल कामना का प्रतीक क्रिसमस-ट्री सजाया जाता है। * पूजा स्थलों के परिसरों को इस तरह सजाया जाता है मानो दिवाली मनाई जा रही है। अंग्रेजी भाषी देशों में विशेष प्रकार की पुडिंग, केक इत्यादि से यह पर्व मनाया जाता है।नमस्कार दोस्तों भारत एक ऐसा देश है जहां पर लगभग सभी धर्मों के लोग रहते हैं और सभी त्योहार बड़ी ही खुशी से मनाते हैं. हमारे देश में ईसाइयों का त्योहार क्रिसमस भी बड़ी ही खुशी से मनाया जाता हैक्या आपको पता है की क्रिसमस क्यों मनाते है l क्रिसमस डे की कहानी क्या है ? क्रिसमस का त्योहार कब से मनाया जाता है ? दोस्तों आज की इस पोस्ट में हम आपको अच्छे से बताएंगे कि क्रिसमस का त्योहार क्यों बनाया जाता है दोस्तों क्रिसमस का त्योहार ईसाइयों का सबसे बड़ा त्यौहार है. ईसाइयों के लिए क्रिसमस का महत्व बहुत ज्यादा है. इस दिन दुनिया भर के इसाई लोग बड़ी ही धूमधाम से इस त्यौहार को मनाते हैं.कुछ लोगों का मानना है कि प्रभु जीसस का जन्म 25 दिसंबर को नहीं हुआ था लेकिन ज्यादातर लोग यही मानते हैं कि प्रभु जीसस का जन्म 25 दिसंबर को हुआ था यही कारण है कि हम क्रिसमस मनाते हैं और इन्हीं की याद में क्रिसमस डे बनाया जाता है. दोस्तों हर त्यौहार के पीछे एक कहानी होती है जैसे की हम दीपावली मनाते हैं तो उसके पीछे श्रीराम की कहानी है होली मनाते हैं तो उसके पीछे प्रहलाद की कहानी है इसी तरह से क्रिसमस के त्योहार के पीछे भी एक कहानी है. क्रिसमस की कहानी आज से करीब 2000 साल पहले की है. बाइबल के अनुसार उस समय रोम का शासन होता था और लोगों पर काफी अत्याचार किए जाते थे. लोगों की पीड़ा को कम करने के लिए तथा लोगों को रोम के शासन से बचाने के लिए प्रभु  ने अपने बच्चे जीसस को धरती पर भेजा था. प्रभु ने जीसस के जन्म के लिए वहां की एक कुंवारी कन्या Merry को चुना और प्रभु ने Merry के पास एक देवदूत को भेजा. देवदूत ने Merry के पास जाकर कहा कि तुम्हें प्रभु के पुत्र जीसस को जन्म देना है.देव दूत ने आगे बताया कि आपका यह बेटा बड़ा होकर राजा बनेगा तथा लोगों पर हो रहे अत्याचारों को कम करेगा. प्रभु के द्वारा भेजी गई दूत गैब्रियल , जो सफ के पास गई और उन्होंने कहा कि आपको Merry नाम की एक लड़की से शादी करनी है जो प्रभु के बच्चे को जन्म देगी. जिस दिन जीसस का जन्म होने वाला था उस समय Merry और जोसेफ बेथलेहम की ओर जा रहे थे. बेथलेहम में उस समय काफी भीड़ थी और रहने के लिए कहीं भी जगह नहीं थी. तब Merry और जोसफ उस रात एक अस्तबल (तबेले) में रात गुजारीइसी रात जीसस का जन्म हुआ और इस दौरान आकाश में एक चमकता हुआ तारा दिखाई दिया जिससे लोगों को आभास हो गया कि उनके प्रभु ने धरती पर अवतार ले लिया है.इस बात की भविष्यवाणी पहले ही हो चुकी थी कि जिस दिन आकाश में सबसे ज्यादा चमकता हुआ तारा दिखाई दे उसी दिन समझ लेना कि धरती पर तुम्हारे प्रभु ने जन्म ले लिया है. प्रभु के जन्म लेने से सभी लोग बहुत खुश हो गए थेईसा मसीह ने अब लोगों के बीच में रहकर उनकी सेवा करनी शुरू कर दी और उनके दुख दर्द को दूर करने का प्रयास करने लग गए.ईसा मसीह ने हमेशा लोगोंको भाईचारे, मानवता और प्रेम से रहने का संदेश दियावह हमेशा कहते थे कि जो तुम्हारा बुरा करता है उसकी भी तुम भलाई करो और अपने शत्रुओं से  भी प्रेम करो|
क्रिसमस क्यों मनाते है… क्रिसमस का त्योहार कई चीजों के लिए मशहूर है. जैसे कि क्रिसमस
ट्री, गिफ्ट और सांता क्लॉसइस दिन सांता क्लॉज बच्चों को गिफ्ट देता है और बच्चों की हरसंभव इच्छा पूरी करने का प्रयास करता है. क्रिसमस के दिन लोग अपने घरों की गिरजाघरों की साफ सफाई करते है. घर, दुकान और गिरजाघर को लोग रंगीन कागजों और फूलों से सुंदर बनाते हैं.इस दिन क्रिसमस ट्री भी बनाया जाता है जिस पर रंग बिरंगे, बल्ब और खिलौने सजाए जाते हैं. इस दिन बच्चे बहुत खुश होते हैं क्योंकि उन्हें अच्छे-अच्छे गिफ्ट गिफ्ट मिलते हैइस दिन लोग एक दूसरे को क्रिसमस की हार्दिक शुभकामनाएं देते हैं.





  पता /-1140 पुराना कटरा प्रयागराज ( इलाहाबाद )